श्री कृष्ण जन्मभूमि
"यह वही कोठरी है जहाँ अँधेरे में सबसे दिव्य जन्म हुआ। जेल का वह पत्थर आज भी करोड़ों माथे का तिलक बन जाता है।"
यह पूरे ब्रज का केन्द्र है — वह छोटी-सी पत्थर की कोठरी जहाँ देवकी माता ने भाद्रपद के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को श्रीकृष्ण को जन्म दिया। वह मूल कारागार भूमि आज भी काँच के आवरण में संरक्षित है। भक्त उस पर साष्टांग प्रणाम करते हैं — कुछ की आँखें भर आती हैं।
इस स्थल का इतिहास बहुत गहरा है। मूल कारागार के ऊपर पहले केशवदेव मंदिर बना, फिर औरंगज़ेब ने १६६९ में उसे ध्वस्त कर शाही ईदगाह बनवाई। आज दोनों संरचनाएँ एक दीवार के दोनों ओर खड़ी हैं। भारत के सबसे संवेदनशील धार्मिक स्थलों में से एक। पर भक्त आते रहते हैं — जन्मभूमि का खिंचाव किसी भी इतिहास से बड़ा है।
परिसर में भागवत भवन भी है — जहाँ कृष्ण के जीवन के दृश्य झाँकियों में दर्शाए गए हैं। वह दृश्य जहाँ शिशु कृष्ण टोकरी में बाढ़ की यमुना पर तैरते हैं — हृदय को छू जाता है।